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Sushant Ki Pathshala: आज का किस्सा उस राजा से जुड़ा है, जिसने हिमालय को ही बेच डाला था. जो उत्तराखंड के एक इलाके का राजा तक बन बैठा था. हर्षिल घाटी में कस्तूरी हिरनों का उसने जमकर शिकार किया. देवदार के पेड़ों को काट कर वो अंधाधुंध कमाई करना चाहता था. चलिये जानते हैं उस राजा की कहानी…
आज का किस्सा उस राजा से जुड़ा है, जिसने हिमालय को ही बेच डाला था.
आज का किस्सा उस राजा से जुड़ा है, जिसने हिमालय को ही बेच डाला था. जो उत्तराखंड के एक इलाके का राजा तक बन बैठा था. ये किस्सा है फ्रेडरिक विल्सन का… फ्रेडरिक विल्सन ब्रिटिश इंडियन आर्मी का सिपाही था और मसूरी छावनी में तैनात था. कहा जाता है कि विल्सन अपने साथी सैनिक का कत्ल कर के भाग गया था. उत्तर की तरफ भागते-भागते विल्सन टिहरी गढ़वाल की रियासत पहुंचा. विल्सन ने टिहरी गढ़वाल के राजा से काम मांगा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया.
टिहरी गढ़वाल से निकल कर विल्सन भागीरथी घाटी के हर्षिल पहुंचा. हर्षिल में ही विल्सन ने एक स्थानीय महिला से शादी कर ली और वहीं बस गया. विल्सन ने हर्षिल घाटी में कस्तूरी हिरनों का जमकर शिकार किया. कस्तूरी हिरनों की खाल और कस्तूरी को विल्सन भारत के बाहर बेचता था. लेकिन विल्सन की नजर पहाड़ के जंगलों में देवदार के पेड़ों पर थी. देवदार के पेड़ों को काट कर वो अंधाधुंध कमाई करना चाहता था.