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Tax Refund on ITR : इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल ने अपने हालिया फैसले में कहा है कि अगर आईटीआर भरने में कोई गलती भी हो जाती है तो भी रिफंड पर ब्याज देने से इनकार नहीं किया जा सकता है. यह फैसला करदाता के रिवाइज्ड आईटीआर में किए गए रिफंड क्लेम और उस पर ब्याज की डिमांड से जुड़ा है.
आईटीआर के रिफंड और ब्याज पर इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल ने बड़ा फैसला सुनाया है.
नई दिल्ली. इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की डेडलाइन बीते 2 महीने से भी ज्यादा का समय बीत चुका है. अगर अभी तक आपका रिफंड नहीं आया तो आपको इनकम टैक्स विभाग से संपर्क करना चाहिए. साथ ही अगर आपके आईटीआर में कोई गलती हो गई है और इनकम टैक्स विभाग ने उस गलती की वजह से रिफंड पर ब्याज का भुगतान नहीं किया है तो आप इसे चुनौती दे सकते हैं. ऐसा इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) ने अपने हालिया फैसले में बताया है. ट्रिब्यूनल ने कहा है कि आईटीआर भरने में किसी गलती की वजह से टैक्सपेयर्स को रिफंड पर ब्याज पाने से नहीं रोका जा सकता है.
ट्रिब्यूनल के सामने यह मामला आकलन वर्ष 2013-14 में आया था. इसमें करदाता ने अपना अपार्टमेंट बेचा और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन हासिल किया था. टैक्सपेयर ने बाद में इसकी जानकारी बतौर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन दी और सेक्शन 112 के तहत इस पर 20 फीसदी टैक्स का भुगतान इंडेक्सेशन के तहत देना स्वीकार किया. ट्रिब्यूनल ने करदाता की ओर से भरे गए रिवाइज्ड आईटीआर को स्वीकार कर लिया और उसे रिफंड के योग्य माना.
क्या है ट्रिब्यूनल का फैसला
आयकर विभाग ने रिवाइज्ड आईटीआर में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का दावा और सेक्शन 244ए के तहत टैक्स रिफंड पर ब्याज देने से इनकार कर दिया. विभाग ने कहा कि करदाता ने ओरिजनल फाइलिंग में हायर टैक्स ब्रेकेट का चुनाव किया था और वह रिवाइज्ड आईटीआर में इसकी सही वजह बताने में भी नाकाम रहा था. ट्रिब्यूनल ने आयकर विभाग के इस दावे को खारिज करते हुए सेक्शन 244ए के तहत रिफंड पर ब्याज देने का फैसला सुनाया. ट्रिब्यूनल ने कहा कि भले ही आईटीआर में गलती हुई है, फिर इससे करदाता को रिफंड पर ब्याज पाने से नहीं रोका जा सकता है.
करदाता ने नजरअंदाज नहीं किया कानून
ट्रिब्यूनल ने कहा कि करदाता ने कानून को नजरअंदाज नहीं किया और न ही किसी डिटेल को अटकाया. उन्होंने किसी भी नोटिस को भी इग्नोर नहीं कया और न ही अपनी किसी अपील प्रक्रिया को छुपाया. ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि आयकर विभाग करदाता को 5.39 करोड़ के रिफंड पर ब्याज का भुगतान करे और मानक वेरिफिकेशन का पालन करे. यह फैसला दिखाता है कि किसी गलती की वजह से करदाता को उसके रिफंड पर ब्याज भुगतान से नहीं रोका जा सकता है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि सेक्शन 244ए यह भी प्रावधान करता है कि अगर अंतिम टैक्स कैलकुलेशन के बाद रिफंड कुल अमाउंट का 10 फीसदी से ज्यादा कम हो जाता है तो उस पर ब्याज नहीं दिया जा सकता. इस मामले में करदाता के सामने ऐसी कोई समस्या नहीं आई.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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