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Paddy Farming Tips: धान की खेती में पानी की बचत और बेहतर उपज के लिए एक नया कृषि यंत्र ‘सिंचाई मॉनिटरिंग इंडिकेटर’ विकसित किया गया है. यह 35 सेमी का प्लास्टिक पाइप खेत में पानी के स्तर को बताता है, जिससे 25% पानी की बचत और 15% उपज में वृद्धि हो सकती है. इसे घर पर भी बनाया जा सकता है.
जहानाबाद: बिहार में बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है. खरीफ का सीजन चल रहा है. धान की रोपाई के 3 महीने बीतने को है. ऐसे में धान की फसल से अब कई खेतों में कलियां भी निकलने लगी है. इस तरह से देखा जाए तो अक्टूबर के अंत तक जिनमें कलियां आ चुकी हैं उन फसलों की कटाई भी होगी. हालांकि, चार महीने से अधिक में तैयार होने वाली फसल की तैयारी से लेकर कटाई तक में पानी का बड़ा रोल होता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, 1 किलो धान के बीज को तैयार करने में करीब 3000 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है. कई बार पानी की उपलब्धता नहीं होने से धान की खेती पर असर पड़ता है.
इन्हीं परेशानियों को दूर करने और कम पानी की उपलब्धता में भी धान की खेती करने में एक मददगार कृषि यंत्र सिंचाई मॉनिटरिंग इंडिकेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह कृषि यंत्र धान के खेत में उपलब्ध पानी का स्तर के बारे में बताता है. यह यंत्र काम कैसे करता है और कैसे बनाया जा सकता है? Local 18 की टीम ने जहानाबाद स्थित कृषि विज्ञान केंद्र गंधार में पदस्थापित कृषि यंत्र एक्सपर्ट इंजीनियर जितेंद्र कुमार से खास बात की. इसके बारे में वो जानकारी दी, जिसे अन्य किसानों को अपनाना चाहिए, ताकि धान की खेती में कम से कम पानी लगे और बेहतर उपज भी प्राप्त किया जाए.
सिंचाई मॉनिटरिंग इंडिकेटर का कमाल
यंत्र एक्सपर्ट इंजीनियर जितेंद्र कुमार ने कहा कि इस कृषि यंत्र का नाम सिंचाई मॉनिटरिंग इंडिकेटर है. इस यंत्र का इस्तेमाल धान के खेत में किया जा सकता है. यह आप घर पर तैयार कर सकते हैं. क्योंकि इसमें आपको 35 सेमी ऊंचाई वाला एक पाइप लेना है, जिसकी मोटाई 4 इंच हो. इसमें छोटा छोटा होल 20 सेमी तक रखना है. छिद्रयुक्त हिस्सा को धान के खेत में ऐसी जगह धंसा देते हैं, जहां आसानी से दिख सके. पाइप का 15 सेमी बिना छिद्र वाला हिस्सा जमीन के ऊपर रहता है. इस पाइप के बीच वाली मिट्टी को हटाकर अलग रख दिया जाता है. इससे उस पाइप में पानी की कितनी उपलब्धता है, यह पता लगता है.
सिंचाई का समय बता देगा यह इंडिकेटर
वो बताते हैं कि यह सिंचाई मॉनिटरिंग पाइप के माध्यम से धान के खेत में कितना पानी है, इसकी जानकारी मिलती रहती है. अगर पानी का लेवल खेत से 4 सेमी ऊपर रहता है तो तब तो दिक्कत नहीं होती है, लेकिन परेशानी तक होती है, जब पानी का लेवल ऊपर खत्म हो जाता है और किसान खेत में पटवन करना शुरू कर देते हैं. ऐसे में वहां यह सिंचाई मॉनिटरिंग इंडिकेटर काम करता है. उस पाइप में छिद्र के माध्यम से यह पता लग पाता है कि जमीन के अंदर किस लेवल तक जल का स्तर पहुंच चुका है? ऐसे में जब जरूरत होती है तो पटवन किसान करता है.
25% तक पानी की बचत और 15% उपज में वृद्धि
एक्सपर्ट ने कहा कि सिंचाई इंडिकेटर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध भी हुआ है. इसके बाद भारत के कुछ राज्यों में यह यंत्र प्रचलन में आया, लेकिन अब बिहार के जहानाबाद जिला स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में भी इस्तेमाल किया जा रहा है. इस मॉनिटरिंग पाइप से मॉनिटर कर 20 से 25 प्रतिशत तक पानी की बचत कर सकते हैं. वहीं, उपज की क्षमता भी 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. ध्यान रहे पटवन का समय सीमा मिट्टी पर निर्भर रहेगा. रेतीली मिट्टी में जल्दी तो चिकनी में 12 से 15 दिन में भी करना होगा.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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