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Vadodara POCSO Love Affair Case: वडोदरा की एक स्पेशल पोक्सो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक युवक को 20 साल की सजा सुनाई. कोर्ट ने माना कि आरोपी और नाबालिग लड़की का रिश्ता आपसी सहमति से था और वे अपनी मर्जी से साथ भागे थे. हालांकि, लड़की के नाबालिग होने के कारण कानून के तहत आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता था. कोर्ट ने कहा कि न्यूनतम सजा अनिवार्य होने के कारण उनके पास कठोर सजा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.
जज ने सख्त फैसला सुनाया. (AI Image)
मोहब्बत की दास्तां जब अदालत की चौखट पर पहुंचती है, तो जज्बात नहीं बल्कि कानून के पन्ने और संविधान की धाराएं ही फैसला तय करती हैं. वडोदरा की एक विशेष पोक्सो कोर्ट ने एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला और आंखें खोल देने वाला फैसला सुनाया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात को खुली अदालत में स्वीकार किया कि आरोपी युवक और नाबालिग लड़की के बीच का रिश्ता पूरी तरह से एक ‘लव अफेयर’ था और दोनों ने अपनी मर्जी से यह कदम उठाया था. लड़की ने खुद स्वेच्छा से अपने प्रेमी के साथ घर छोड़ा था, यानी मामला साफ तौर पर आपसी सहमति का था. लेकिन इसके बावजूद, कानून के लंबे हाथ और पोक्सो अधिनियम की सख्त धाराएं इस कदर मजबूत थीं कि अदालत के पास आरोपी को बरी करने का कोई रास्ता नहीं बचा.
चूंकि पीड़िता घटना के वक्त 18 साल से कम उम्र की यानी नाबालिग थी, इसलिए जज्बात और रजामंदी की तमाम दलीलें धरी की धरी रह गईं. कानून के कड़े दायरे में बंधे जज ने आरोपी को कोई भी नरमी न देते हुए सीधे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुना दी. इस अदालती फैसले ने आज की पीढ़ी को यह कड़ा संदेश दे दिया है कि कानूनी रूप से नाबालिग के मामले में सहमति का कोई मोल नहीं होता और कानून तोड़ने की कीमत बहुत भारी पड़ सकती है.
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा कानूनी ड्रामा मार्च 2025 में वडोदरा शहर के एक पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई शिकायत से शुरू हुआ था. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, लड़की घटना के वक्त 18 साल से कम उम्र की थी और वह अपनी मर्जी से आरोपी युवक के साथ घर छोड़कर चली गई थी. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसके बाद वह छह महीने तक हिरासत में रहा और बाद में उसे जमानत मिल गई. इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 14 गवाहों से पूछताछ की, जिसमें डॉक्टर, जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल थे.
फैसले के मुख्य प्वाइंट्स
1. वडोदरा की स्पेशल फास्ट ट्रैक पोक्सो कोर्ट (2nd Additional Sessions Judge) ने सुनवाई के दौरान इस बात को बिल्कुल स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि आरोपी और पीड़िता के बीच का संबंध पूरी तरह से एक लव अफेयर और आपसी रजामंदी वाला रिश्ता था.
2. कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि भले ही दोनों के बीच आपसी सहमति थी, लेकिन चूंकि घटना के समय लड़की की उम्र 18 साल से कम यानी वह नाबालिग थी, इसलिए कानून के प्रावधानों के तहत आरोपी को दोषी माना जाना तय था.
3. मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी रिकॉर्ड किया कि लड़की अपनी मर्जी और स्वेच्छा से आरोपी के साथ गई थी, जिसके चलते अदालत ने पीड़िता को अलग से कोई भी मुआवजा देने से साफ इनकार कर दिया.
4. हालांकि, कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि आरोपी पर लगाए गए कुल जुर्माने की राशि में से 45,000 रुपये पीड़िता को दिए जाएं, ताकि न्याय के उद्देश्यों को सही तरीके से पूरा किया जा सके और पीड़िता को राहत मिल सके.
5. इस पूरे कानूनी फैसले के केंद्र में पीड़िता की उम्र रही, क्योंकि अदालत में यह साबित हो चुका था कि वह बालिग नहीं थी और उनके बीच एक से अधिक बार शारीरिक संबंध बने थे, जिसके लिए कानून में न्यूनतम सजा तय है.
6. जिला सरकारी वकील अनिल देसाई ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकतम सजा और निवारक दंड की मांग की, जबकि बचाव पक्ष के वकील एसजी दुर्गे ने आरोपी की कम उम्र, कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड न होने और परिवार का इकलौता कमाने वाला होने का हवाला देकर न्यूनतम सजा की गुहार लगाई थी.
7. तमाम दलीलों और पक्षों को सुनने के बाद, विशेष अदालत ने कानून के कड़े नियमों का पालन करते हुए आरोपी युवक को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दोषी ठहराया और उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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