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कम लागत में डबल मुनाफा तालाब में ऐसे उगाएं सिंघाड़ा महीने में तैयार


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कम लागत में डबल मुनाफा, तालाब में ऐसे उगाएं सिंघाड़ा, 6 महीने में तैयार

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Water Chestnut Cultivation: कृषि अधिकारी बताते है कि सिंघाड़े की रोपाई से पहले बीज को पानी में भिगोकर अंकुरित होने दें. जब उसमें अंकुरण हो जाए तब तैयार किए गए तालाब में अंकुरित पौधे की रोपाई कर दे. 2-3 पौधों को एक साथ लेकर अच्छी तरह से रोपाई करें. रोपाई करते समय ध्यान दे कि पौधे से पौधे के बीच की दूरी 1 से 2 फीट तक होनी चाहिए. ताकि पौधे का विकास अच्छे से हो और पैदावार भी अच्छी होगी.

रायबरेलीः हमारा देश कृषि प्रधान है. यहां की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है. लोग मौसम और जलवायु के अनुसार फसलों की खेती करके अच्छा मुनाफा कमाते है. कुछ किसान परंपरागत फसलों जैसे धान, गेंहू के अलावा बागवानी भी कर रहे है. कुछ किसान ऐसे भी है जो तालाब बनाकर सिंघाड़े की खेती करते है. इसे अंग्रेजी में “वाटर चेस्ट नट” कहा जाता है. यह एक ऐसी फसल है जो पानी में ही उगाई जाती है. इसकी खेती करके किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाते है.

रायबरेली के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के कृषि रक्षा विशेषज्ञ ऋषि कुमार चौरसिया लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि मानसून की बरसात शुरू होने के साथ ही सिंघाड़े की खेती करने वाले किसान इस फसल की बुवाई की तैयारी शुरू कर देते है. यानी जून, जुलाई से लेकर अगस्त तक इस फसल की रोपाई की जाती है. सिंघाड़े की फसल 6 महीने में तैयार हो जाती है.

इन बातों का रखें ध्यान
कृषि अधिकारी बताते है कि सिंघाड़े की रोपाई से पहले बीज को पानी में भिगोकर अंकुरित होने दें. जब उसमें अंकुरण हो जाए तब तैयार किए गए तालाब में अंकुरित पौधे की रोपाई कर दे. 2-3 पौधों को एक साथ लेकर अच्छी तरह से रोपाई करें. रोपाई करते समय ध्यान दे कि पौधे से पौधे के बीच की दूरी 1 से 2 फीट तक होनी चाहिए. ताकि पौधे का विकास अच्छे से हो और पैदावार भी अच्छी होगी. सिंघाड़े की फसल को रोग और कीट से बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर उचित कीटनाशक का प्रयोग करे. रोपाई के लगभग एक माह बाद प्रति हेक्टेयर की दर से 30 से 40 किलोग्राम यूरिया का छिड़काव करें. इसकी खेती के लिए किसान 6.5 से 7.5 पीएच मान वाली मिट्टी का चयन करे.

इन किस्मों का करें चयन
ऋषि कुमार चौरसिया बताते है कि सिंघाड़े की खेती करने वाले किसान उन्नत किस्म का ही चयन करे. जिनमें प्रमुख रूप से लाल गठुआ, लाल चिकनी गुलरी, हरीरा गठुआ, कटीला, शारदा, भगवती ,गोदावरी प्रजातियां शामिल है. ये प्रजातियां अपनी उच्च पैदावार के लिए जानी जाती है. सिंघाड़े की फसल रोपाई के 6 माह बाद तैयार हो जाती है, इसके भंडारण के लिए किसान ऐसी जगह का चयन करे. जहां पर सिंघाड़े के फल को रखने पर वह सूखने न पाए. ऐसा करने से फल की ताजगी बनी रहेगी.

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Manish Rai

Manish Rai is a digital journalist with over 8 years of experience in regional and digital media. He is currently associated with News18 as the Local18 Uttar Pradesh Coordinator, where he works on planning, coo…

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