Chronovissor

--:--:-- -- ... | ... |
भारतन्यूज़ - Header

बस मिनट और तो क्रैश हो जाता फ्लाइ दुबई का विमान कैप्टन सुजीत ओझा ने बताई अंदर की कहानी…


होमताजा खबरदेश

‘3 मिनट और मिलते तो क्रैश हो जाता विमान’, कैप्टन सुजीत ने बताई अंदर की कहानी

Last Updated:

फ्लाई दुबई के फ्लाइट में हुए हमले ने उड़ान के दौरान सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर था और अचानक हजारों फीट नीचे आने लगा. ऐसे में पायलट के सामने कुछ ही सेकंड में बड़ा फैसला लेने की चुनौती थी. न्यूज18 से बातचीत में कैप्टन सुजीत ओझा ने इस पूरी घटना को कॉकपिट के नजरिए से समझाया. उन्होंने बताया कि 7700 इमरजेंसी अलार्म कैसे लगाया जाता है. कॉकपिट में कुल्हाड़ी क्यों रखी जाती है और पायलटों को ऐसी आपात स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग कैसे दी जाती है.

'3 मिनट और मिलते तो क्रैश हो जाता विमान', कैप्टन सुजीत ने बताई अंदर की कहानीZoom

फ्लाई दुबई विमान में हमले के बाद करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर क्या हुआ, कैप्टन सुजीत ने समझाया.

फ्लाई दुबई की फ्लाइट 34 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था और सब कुछ सामान्य नजर आ रहा था. तभी कॉकपिट के अंदर ऐसा हमला हुआ जिसने करीब 180 यात्रियों की जान खतरे में डाल दी. को-पायलट ने साथी पायलट पर चाकू से हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की. इस दौरान विमान अचानक तेजी से नीचे आने लगा. महज एक मिनट में विमान करीब 17 हजार फीट नीचे आ गया. कॉकपिट में मौजूद पायलट और कुछ यात्रियों ने हमलावर को रोकने की कोशिश की. इसी बीच इमरजेंसी संकेत भेजा गया. विमान को बाद में सऊदी अरब के ताबुक हवाई अड्डे पर आपात स्थिति में उतारा गया. इस पूरी घटना ने विमान सुरक्षा और कॉकपिट में पायलटों की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इस घटना को समझने के लिए न्यूज18 ने कैप्टन सुजीत ओझा से खास बातचीत की है.

कैप्टन सुजीत ओझा ने बताया कि 34 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान के अचानक नीचे आने पर कॉकपिट के अंदर किस तरह की स्थिति बनती है. उन्होंने यह भी समझाया कि पायलट ऐसी स्थिति में 7700 आपातकालीन संकेत कैसे लगाते हैं. कॉकपिट के दरवाजे की सुरक्षा व्यवस्था कैसी होती है और किसी आपात स्थिति में पायलटों के पास क्या विकल्प होते हैं. कैप्टन ओझा ने यह भी बताया कि विमान में रखी छोटी कुल्हाड़ी का इस्तेमाल कब किया जा सकता है. सबसे अहम बात यह है कि पायलटों को प्रशिक्षण के दौरान ऐसी असामान्य परिस्थितियों से निपटने के लिए किस तरह तैयार किया जाता है.

34 हजार फीट पर अचानक नीचे आने लगा विमान

  • कैप्टन सुजीत ओझा ने कॉकपिट की स्थिति को समझाते हुए बताया कि अगर विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा हो और अचानक नीचे की तरफ आने लगे तो यह सामान्य स्थिति नहीं होती. कॉकपिट की स्क्रीन पर पायलट लगातार विमान की ऊंचाई और गति पर नजर रखते हैं. विमान ऊपर जा रहा है या नीचे आ रहा है इसकी जानकारी लगातार मिलती रहती है.
  • उन्होंने कॉकपिट की स्क्रीन का उदाहरण देते हुए बताया कि विमान की चढ़ाई के दौरान उसकी गति करीब 232 नॉट दिखाई दे सकती है. एक नॉट लगभग 1.852 किलोमीटर प्रति घंटे के बराबर होता है. ऐसे में अगर विमान अचानक तेजी से नीचे आने लगे तो पायलट को तुरंत स्थिति समझनी होती है. सबसे पहले विमान को नियंत्रित करना जरूरी होता है. इसके बाद आपातकालीन प्रक्रिया शुरू की जाती है.

एक मिनट में 17 हजार फीट नीचे आना कितना गंभीर?

फ्लाई दुबई की घटना में विमान के करीब एक मिनट में 17 हजार फीट नीचे आने की बात सामने आई है. कैप्टन ओझा के मुताबिक ऐसी स्थिति में कॉकपिट के अंदर हर सेकंड बेहद अहम होता है. पायलट को विमान की ऊंचाई के साथ उसकी गति और दिशा पर भी नजर रखनी होती है. अगर विमान सामान्य उड़ान के दौरान अचानक नीचे आने लगे तो पायलटों को यह पता करना होता है कि ऐसा क्यों हो रहा है. इस दौरान विमान को सुरक्षित ऊंचाई पर लाना प्राथमिकता होती है. कैप्टन ओझा ने बताया कि पायलटों को प्रशिक्षण के दौरान ऐसी असामान्य परिस्थितियों का अभ्यास कराया जाता है ताकि वास्तविक घटना के समय फैसला लेने में देरी न हो.

7700 अलार्म कैसे लगाया जाता है?

कैप्टन सुजीत ओझा ने 7700 आपातकालीन अलार्म के बारे में भी विस्तार से बताया. विमान में एक ट्रांसपोंडर होता है. इसके जरिए पायलट हवाई यातायात नियंत्रण को आपात स्थिति की जानकारी दे सकते हैं. 7700 एक सामान्य आपातकालीन संकेत है. पायलट कॉकपिट में ट्रांसपोंडर पर यह संकेत चुनते हैं. इसके बाद हवाई यातायात नियंत्रकों को पता चल जाता है कि विमान आपात स्थिति में है. इससे विमान को प्राथमिकता दी जा सकती है. जरूरत पड़ने पर उसके लिए आपात लैंडिंग की व्यवस्था भी की जाती है.

कॉकपिट में कुल्हाड़ी क्यों रखी जाती है?

कैप्टन ओझा ने कॉकपिट में रखी छोटी कुल्हाड़ी के बारे में भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि विमान में आपात स्थिति के लिए कुल्हाड़ी रखी जाती है. अगर किसी हादसे के दौरान कोई दरवाजा फंस जाए या किसी चीज को काटने की जरूरत पड़े तो इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि बोइंग 737 जैसे विमान में यह कुल्हाड़ी कॉकपिट के अंदर रखी होती है. यह को-पायलट के पीछे की तरफ एक स्थान पर रहती है. यह एक केस में बंद रहती है. जरूरत पड़ने पर केस खोलकर इसे निकाला जा सकता है. इसके लिए कांच तोड़ने जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती.

कॉकपिट का दरवाजा कैसे खुलता है?

कैप्टन ओझा ने बताया कि कॉकपिट का दरवाजा विमान की सुरक्षा व्यवस्था का बेहद अहम हिस्सा है. इसे सामान्य दरवाजे की तरह नहीं समझा जा सकता. कॉकपिट में प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था होती है. उन्होंने फ्लाई दुबई की घटना के संदर्भ में बताया कि अगर कॉकपिट के अंदर पायलट पर हमला हो जाए तो स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाती है. पायलट को एक तरफ हमले से निपटना होता है और दूसरी तरफ विमान का नियंत्रण भी बनाए रखना होता है. ऐसी स्थिति में कुछ सेकंड का फैसला भी सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा होता है.

पायलट ट्रेनिंग में ऐसी स्थिति के लिए क्या सिखाया जाता है?

कैप्टन सुजीत ओझा के मुताबिक पायलटों को सिर्फ विमान उड़ाने की ट्रेनिंग नहीं दी जाती. उन्हें कई तरह की आपात और असामान्य परिस्थितियों से निपटने के लिए भी तैयार किया जाता है. अचानक ऊंचाई कम होना. विमान में तकनीकी समस्या आना. कॉकपिट में किसी तरह की गंभीर स्थिति पैदा होना. इन सभी परिस्थितियों में तेजी से फैसला लेने का अभ्यास कराया जाता है. उन्होंने फ्लाई दुबई की घटना के संदर्भ में कहा कि अगर किसी पायलट पर हमला हुआ हो और वह घायल भी हो गया हो तो उसके बावजूद विमान को संभालना बेहद मुश्किल काम है. ऐसी स्थिति में पायलट सिर्फ अपनी जान के लिए जिम्मेदार नहीं होता. विमान में बैठे सभी यात्रियों की सुरक्षा भी उसके फैसले पर निर्भर करती है.

कैप्टन स्मित मच्छार ने कैसे बचाई यात्रियों की जान?

फ्लाई दुबई की इस घटना में कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका की काफी चर्चा हो रही है. रिपोर्टों के मुताबिक विमान में करीब 180 लोग सवार थे. इनमें लगभग 150 इजराइली नागरिक थे. हमले के बाद विमान को सऊदी अरब के ताबुक हवाई अड्डे पर आपात स्थिति में उतारा गया. इजराइल की ओर से लड़ाकू विमानों को निगरानी के लिए भेजे जाने की बात भी सामने आई. वहीं कैप्टन सुजीत ओझा ने इस पूरे घटनाक्रम को पायलट के लिए बेहद कठिन स्थिति बताया. उनके मुताबिक अगर विमान को संभालने में कुछ मिनट और देरी होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी. इसी वजह से इस घटना में पायलट की ट्रेनिंग और सही समय पर लिया गया फैसला सबसे अहम पहलुओं में से एक रहा.

About the Author

सुमित कुमारSenior Sub Editor

सुमित कुमार हिंदी पत्रकारिता का एक उभरता और सक्रिय नाम हैं. वर्तमान में वे News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और सेंट्रल डेस्क टीम का हिस्सा हैं. पिछले चार साल से वे Network18और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top