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Sajjan Kumar Dies: कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उन्हें 1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषी ठहराया गया था. वह तिहाड़ जेल में सजा काट रहे थे. 1970 के दशक में दिल्ली एक बैकरी और चाय की दुकान चलाने वाले सज्जन कुमार बहुत जल्दी राजधानी के एक दबंग नेता बन गए थे. संजय गांधी ने उनको राजनीति में लाया था.
पूर्व कांग्रेसी और दिल्ली के बड़े नेता रहे सज्जन कुमार का निधन हो गया. फाइल फोटो- पीटीआई
Sajjan Kumar Dies: कांग्रेस के पूर्व नेता रहे सज्जन कुमार का निधन हो गया है. 1984 के सिख विरोधी दंगों में सज्जन कुमार को कोर्ट ने दोषी करार दिया था. उन्होंने 80 वर्ष की उम्र में गुरुवार को अंतिम सांस ली. सज्जन कुमार की दिल्ली में लंबे समय तक एक दबंग नेता की छवि रही. उन्होंने एक बेकरी और चाय की दुकान से उठकर राजनीति की दुनिया में कदम रखा. उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय संजय गांधी को जाता है. पहले वह पार्षद बने. फिर दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश को मात देकर संसद भवन पहुंचे.
चाय की दुकान और बेकरी से शुरू हुआ सफर
सज्जन कुमार का शुरुआती जीवन बेहद साधारण था. राजनीति में आने से पहले वह दिल्ली में बेकरी और चाय की दुकान चलाते थे. यहीं से उनकी पहचान स्थानीय स्तर पर बननी शुरू हुई. 1970 के दशक के आखिर में उनकी मुलाकात संजय गांधी से हुई. संजय गांधी ने उनमें राजनीतिक संभावनाएं देखीं. इसके बाद उन्हें कांग्रेस में आगे बढ़ने का मौका मिला. संजय गांधी के समर्थन ने सज्जन कुमार के राजनीतिक सफर को रफ्तार दे दी. 1977 में उन्होंने दिल्ली नगर निगम का चुनाव लड़ा और पार्षद बन गए. इसके बाद दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी में भी उन्हें अहम जिम्मेदारी मिली. एक सामान्य दुकानदार से कांग्रेस के उभरते हुए नेता तक का उनका सफर बेहद तेज था.
संजय गांधी के करीबी होने का मिला फायदा
सज्जन कुमार के राजनीतिक उभार में संजय गांधी की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है. उस दौर में संजय गांधी कांग्रेस के भीतर तेजी से प्रभावशाली हो रहे थे. सज्जन कुमार उनके भरोसेमंद लोगों में शामिल हो गए. यही वजह थी कि स्थानीय राजनीति में कदम रखने के कुछ ही साल बाद उन्हें बड़े चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिला. 1980 में उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा. सामने थे चौधरी ब्रह्म प्रकाश. ब्रह्म प्रकाश दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री रह चुके थे और राजधानी की राजनीति में उनका बड़ा कद था. इसके बावजूद सज्जन कुमार ने उन्हें चुनाव में हरा दिया. इसके साथ ही वह दिल्ली की राजनीति के बड़े चेहरों में शामिल हो गए.
तीन बार संसद पहुंचे
सज्जन कुमार का राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ता गया. वह तीन बार लोकसभा सांसद रहे. बाहरी दिल्ली संसदीय सीट पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी. उनकी राजनीति का आधार जमीनी संगठन और स्थानीय नेताओं-कार्यकर्ताओं का बड़ा नेटवर्क था. दिल्ली में उनका प्रभाव इतना बढ़ गया था कि कांग्रेस की राजनीति में उनकी गिनती ताकतवर नेताओं में होने लगी. संजय गांधी की 1980 में विमान हादसे में मौत हो गई. लेकिन इसका सज्जन कुमार के राजनीतिक प्रभाव पर तत्काल कोई बड़ा असर नहीं पड़ा. उन्होंने दिल्ली में अपनी अलग राजनीतिक जमीन बना ली थी.
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में दंगा
31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी. इसके बाद देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क उठी. दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में थी. हजारों सिखों की हत्या की गई. इन दंगों में सज्जन कुमार पर भीड़ को भड़काने और हिंसा में भूमिका निभाने के गंभीर आरोप लगे.
34 साल बाद आया बड़ा फैसला
सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के दंगों से जुड़े कई मामले दर्ज थे. इनमें से एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2018 में उन्हें दोषी ठहराया. यह मामला दिल्ली में एक परिवार के पांच सदस्यों की हत्या से जुड़ा था. निचली अदालत से राहत मिलने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की दोबारा सुनवाई की और सज्जन कुमार को दोषी माना. अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई. यह फैसला 1984 के दंगों के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक माना गया.
1984 के दंगों के बाद कई वर्षों तक आरोप लगते रहे कि प्रभावशाली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई. सज्जन कुमार का मामला भी इसी वजह से लंबे समय तक चर्चा में रहा. दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया में आई देरी पर गंभीर सवाल उठाए. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि राजनीतिक संरक्षण की वजह से आरोपी लंबे समय तक कानून की पकड़ से बाहर रहे. सज्जन कुमार ने अपने खिलाफ आए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही थी. बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया और वह उम्रकैद की सजा काट रहे थे.
कांग्रेस से रिश्ता खत्म
दोषी करार देने के बाद सज्जन कुमार ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. जिस पार्टी के साथ उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ था, उससे उनका रिश्ता आखिरकार खत्म हो गया. एक समय दिल्ली में कांग्रेस के ताकतवर नेताओं में गिने जाने वाले सज्जन कुमार की पहचान बाद के वर्षों में 1984 के दंगों के दोषी के रूप में होने लगी. उनका राजनीतिक उभार जितना तेज था, उनकी राजनीतिक विरासत का अंत उतना ही विवादित और त्रासद रहा.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…
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