Last Updated:
FSSAI Alcohol Ban: एफएसएसएआई ने लैब टेस्ट में गड़बड़ी मिलने पर बड़ी शराब कंपनियों के चुनिंदा व्हिस्की और रम ब्रांड्स पर बैन लगा दिया है. जांच में यूनाइटेड स्पिरिट्स की एंटीक्विटी ब्लू व रॉयल चैलेंज, इनब्रू की बैगपाइपर व ओल्ड कास्क और मोहन रॉकी की ओल्ड मॉन्क के 3 वैरिएंट्स में ऊपर से आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाने का खुलासा हुआ. नियमों के मुताबिक शराब में सिर्फ नेचुरल फ्लेवर की इजाजत है लेकिन कंपनियां मैच्योरिटी के लंबे प्रोसेस से बचने के लिए शॉर्टकट अपना रही थीं.
सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया.
शीरा, माल्ट और अंगूर का वो सदियों पुराना घूंट जिसे बनने में सालों-साल का सब्र लगता था, अब उसे लैब के महज कुछ बूंद कैमिकल्स से बनाया जा रहा था. सोचिए, जिस एंटीक्विटी, रॉयल चैलेंज और दशकों पुरानी ओल्ड मॉन्क को आप रॉयल और प्रीमियम समझकर पी रहे थे, उसमें बोतल का असली स्वाद नहीं बल्कि ऊपर से मिलाया गया आर्टिफिशियल फ्लेवर घुल रहा था. देश में जब इस खतरनाक शॉर्टकट और मिलावट के खेल से पर्दा उठा तो फूड सेफ्टी रेगुलेटर FSSAI के भी होश उड़ गए. शराब की दुनिया के सबसे बड़े दिग्गज यूनाइटेड स्पिरिट्स, इनब्रू और मोहन रॉकी के कई मशहूर ब्रांड्स पर FSSAI ने करारा चाबुक चलाया है. लैब टेस्ट की रिपोर्ट सामने आते ही व्हिस्की और रम के चुनिंदा वेरिएंट्स की बिक्री पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई. आखिर एंटीक्विटी, रॉयल चैलेंज और दशकों पुरानी ओल्ड मॉन्क जैसी बोतलों के अंदर ऐसा क्या मिलाया जा रहा था कि सरकार को बैन का यह सख्त कदम उठाना पड़ा?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह कार्रवाई लैब टेस्ट में उत्पादों के सब-स्टैंडर्ड पाए जाने के बाद की गई है. FSSAI द्वारा जारी बयान में कहा गया कि लैब टेस्ट में पाया गया कि कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शराब में प्राकृतिक मैच्योरिटी (परिपक्वता) और पारंपरिक निर्माण प्रक्रियाओं के बजाय बाहरी आर्टिफिशियल या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर्स मिला रही थीं. हैरानी की बात यह है कि रम में रम का स्वाद और व्हिस्की में व्हिस्की का स्वाद देने के लिए ऊपर से फ्लेवर मिलाया जा रहा था. नियामक ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कोई सिस्टम मान्य नहीं है जहां शराब में उसी पेय का आर्टिफिशियल फ्लेवर अलग से जोड़ा जाए.
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कुछ चुनिंदा यूनिट पर रोक
यह प्रतिबंध मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कुछ चुनिंदा निर्माण यूनिट में बने उत्पादों पर लागू हुआ है:
• यूनाइटेड स्पिरिट्स (मध्य प्रदेश): एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की.
• इनब्रू बेवरेजेस (मध्य प्रदेश): बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम.
• मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर (महाराष्ट्र): देश की मशहूर ओल्ड मॉन्क (Old Monk) रम के तीन वैरिएंट्स.
किन-किन ब्रांड्स पर गिरी गाज?
- ओल्ड मोंक रम के कई वेरिएंट्स
- मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम
- बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की
- ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम
- एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की
- रॉयल चैलेंज व्हिस्की
पारंपरिक प्रक्रिया को दरकिनार करने का आरोप
खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अल्कोहलिक बेवरेजेस में केवल प्राकृतिक सुगंधित पदार्थों के इस्तेमाल की अनुमति है. FSSAI का आरोप है कि कंपनियां शीरा, माल्ट या अंगूर जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से स्वाभाविक रूप से स्वाद विकसित करने और उचित परिपक्वता की लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए शॉर्टकट अपना रही थीं.
कड़े नियमन की दिशा में FSSAI का कदम
हाल के दिनों में FSSAI ने खाद्य और पेय क्षेत्र में अपनी निगरानी काफी सख्त कर दी है. हाल ही में नियामक ने पेप्सी और रेड बुल जैसी वैश्विक कंपनियों के दबाव को दरकिनार करते हुए, हाई कैफीन वाले पेय पदार्थों को एनर्जी ड्रिंक्स के रूप में ब्रांडिंग करने पर भी रोक लगाई थी. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह रोक केवल चिह्नित फैक्ट्रियों के स्टॉक पर लागू होगी या इन ब्रांड्स के अन्य राज्यों में स्थित प्लांट्स पर भी इसका असर पड़ेगा.
About the Author
पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
और पढ़ें