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तेलंगाना के इस मंदिर में हर साल बढ़ते हैं गणेश जी साल में फीट हुआ आकार…


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तेलंगाना में हर साल तिल जितनी बढ़ती है गणेश प्रतिमा, 6.5 फीट हुआ आकार

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Telangana Siddhi Vinayaka Temple: तेलंगाना के संगारेड्डी स्थित रेजिंथल गांव के सिद्धि विनायक मंदिर में भगवान गणेश की स्वयंभू मूर्ति का आकार हर साल तिल जितना बढ़ता है. 200 साल पहले छोटी शिला के रूप में प्रकट हुई यह मूर्ति अब 6.5 फीट ऊंची हो चुकी है. मंदिर की एक खास बात इसका दक्षिणमुखी होना भी है. जहां भक्त इसे बप्पा का साक्षात चमत्कार मानते हैं, वहीं कुछ लोग सिंदूर व चोला चढ़ाने के लेप को वजह बताते हैं. गणेश चतुर्थी पर यहां तेलंगाना, महाराष्ट्र व कर्नाटक से हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.

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Telangana Siddhi Vinayaka Temple: भारत में ऐसे कई ऐतिहासिक मंदिर हैं जो अपने अनूठे इतिहास और चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में जहीराबाद के पास स्थित रेजिंथल गांव का सिद्धि विनायक मंदिर भी इन दिनों अपनी एक अनोखी और रहस्यमयी मान्यता को लेकर श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है. इस मंदिर की सबसे हैरान करने वाली बात यहां स्थापित भगवान गणेश की दिव्य मूर्ति का निरंतर बढ़ता हुआ आकार है.

स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और मंदिर के पुजारियों के अनुसार यह स्वयंभू प्रतिमा हर साल एक राई या तिल के दाने जितनी बढ़ती है. कहा जाता है कि जब लगभग 200 साल पहले यह प्रतिमा पहली बार एक प्राकृतिक शिला के रूप में प्रकट हुई थी, तब इसका आकार काफी छोटा था. लेकिन समय के साथ-साथ इसका कद धीरे-धीरे बढ़ता गया और आज यह दिव्य मूर्ति लगभग 6.5 फीट की भव्य ऊंचाई तक पहुंच चुकी है. हर साल आकार में होने वाले इस सूक्ष्म बदलाव को भक्त भगवान श्री गणेश का साक्षात चमत्कार मानते हैं.

दक्षिणमुखी मूर्ति और अनूठी मान्यताएं

इस मंदिर की एक और बड़ी विशेषता इसका दक्षिणमुखी होना है. आमतौर पर हिंदू मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख किए होती हैं. दक्षिण की ओर मुख वाली गणेश प्रतिमाएं बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं. श्रद्धालुओं का अटल विश्वास है कि दक्षिणमुखी सिद्धि विनायक के दर्शन करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

सिंदूर लेप या साक्षात चमत्कार?

जहां लाखों भक्त इसे बप्पा की असीम कृपा और जीवित चमत्कार मानते हैं, वहीं जानकारों का एक वर्ग यह भी मानता है कि सदियों से लगातार सिंदूर, तेल और चोला चढ़ाने के लेप से भी मूर्ति का स्वरूप धीरे-धीरे विशाल प्रतीत होने लगता है. हालांकि इस रहस्य का वैज्ञानिक या धार्मिक पहलू जो भी हो, रेजिंथल के सिद्धि विनायक मंदिर में भक्तों का तांता साल भर लगा रहता है. गणेश चतुर्थी और अंगारक चतुर्थी के पावन अवसरों पर तेलंगाना, महाराष्ट्र और कर्नाटक से हजारों श्रद्धालु इस अद्भुत रहस्य के साक्षी बनने यहां पहुंचते हैं.

About the Author

vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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