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Jharkhand Exam Cancellation Crisis | 2394 Officers Face Job Termination


रांची3 घंटे पहले

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झारखंड सरकार की ओर से 22 प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद इन परीक्षाओं के जरिए नियुक्त 2,394 अफसरों की सेवाओं पर संकट खड़ा हो गया है।परीक्षाएं रद्द करने का फैसला हो चुका है।

लेकिन संबंधित विभागों की ओर से इन कर्मचारियों-अधिकारियों को सेवा से हटाने का विधिवत आदेश अभी जारी नहीं किया गया है। यानी फिलहाल ये अधिकारी तकनीकी रूप से सेवा में हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

अधिकारी तकनीकी रूप से सेवा में हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

अधिकारी तकनीकी रूप से सेवा में हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही सेवा समाप्ति की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर सकती है। यदि इन्हें हटाया गया तो कई सरकारी विभागों में कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या अचानक कम हो जाएगी। इसका सीधा असर रोजमर्रा के सरकारी कामकाज, फाइलों के निपटारे और विभागीय काम की गति पर पड़ने की आशंका है।

इसका असर सचिवालय में दिखने लगा। सचिवालय सेवा के 854 सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों (ASO), जो पिछले आठ माह से काम कर रहे थे और विभागीय फाइलों के कस्टोडियन थे, उन्हें सचिवालय में प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने प्रोजेक्ट भवन के सामने प्रदर्शन किया। इन 854 ASO के हटने पर अधिकांश विभाग सहायक प्रशाखा पदाधिकारी विहीन हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में प्रशाखा पदाधिकारियों को ही अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ेगी।

पद खाली हुए तो बढ़ेगा काम का दबाव

22 परीक्षाओं के रद्द होने से 11वीं-13वीं सिविल सेवा के प्रोवेशन पर तैनात 342 राजपत्रित अधिकारी भी प्रभावित हुए हैं। इनमें 207 राज्य प्रशासनिक सेवा, 35 पुलिस सेवा, 56 वित्त सेवा और 44 अन्य राजपत्रित सेवा के अधिकारी हैं।

इनकी सेवाएं खत्म होने पर संबंधित विभागों में स्वीकृत पदों के मुकाबले काम करने वाले अधिकारियों की संख्या घट सकती है। इसका असर सिर्फ सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिन विभागों और कार्यालयों में ये अधिकारी तैनात हैं, वहां भी देखने को मिलेगा।

खासकर फाइलों की जांच, अग्रसारण, प्रशासनिक निर्णय और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं में देरी की आशंका रहेगी। हालांकि अभी सेवा समाप्ति का औपचारिक आदेश नहीं आया है, इसलिए तत्काल स्थिति को अंतिम नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि सरकार जल्द ही इनकी सेवाएं समाप्त करती है तो एक साथ 2,394 पदों पर कार्यरत अफसरों के हटने से सरकारी तंत्र में मैनपावर की कमी पैदा हो सकती है।

पहले से अधिकारी कम, अब और पद खाली

विभिन्न संवगों में पद पहले से ही खाली थे। अब 2394 अफसरों की सेवा खत्म होने से मैनपावर की समस्या बढ़ गई है। ऐसे में डिप्टी कलेक्टर के 450 पद खाली हो गए हैं। इससे सरकार के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। आंकड़े के अनुसार राज्य प्रशासनिक सेवा के सृजित पदों की कुल संख्या लगभग 1450 है।

इनमें बेसिक ग्रेड (डिप्टी कलेक्टर) के लगभग 850 पद हैं। इनमें लगभग 250 पद पहले से रिक्त थे। उधर, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के 64 पद पर सेवा समाप्त होने से आने वाले दिनों में समाज कल्याण विभाग के काम भी प्रभावित होंगे। इसी तरह फूड सेफ्टी अफसर के 56 और जेएसएससी-सीजीएल के तहत बीएसओ, एलडीसी व अन्य श्रेणी के 1078 पद भी खाली हो जाएंगे।

डिप्टी कलेक्टर-डीएसपी के 500 से ज्यादा पद खाली

डिप्टी कलेक्टर की ट्रेनिंग ले रहे 207 अधिकारियों ने अक्टूबर 2025 में योगदान दिया था। ज्वाइनिंग के बाद उन्हें एटीआई में ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद मार्च 2026 में फील्ड ट्रेनिंग के लिए विभिन्न जिलों में पदस्थापित किया गया। उपायुक्तों ने इन्हें प्रखखंड और अंचल की जिम्मेदारी भी दी थी। राज्य में पहले से ही डिप्टी कलेक्टर के करीब 250 पद खाली हैं।

ऐसे में इन अफसर के नहीं रहने से प्रशासनिक स्तर पर मैनपावर की कमी और बढ़ेगी। इसी तरह डीएसपी रैंक में पहले से 35 पद खाली हैं। नव नियुक्त राज्य पुलिस सेवा के 35 अधिकारियों की सेवा समाप्त होने की स्थिति में डीएसपी रैंक के करीब 70 पद खाली हो जाएंगे। इससे विधि-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका है।

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