अब EC के पोर्टल को लेकर एक दर्जन ट्रिब्यूनल जजों ने की शिकायत, उठाए गंभीर सवाल
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पश्चिम बंगाल में एसआईआर के तहत डिलीट वोटरों की अपील सुन रहे ट्रिब्यूनल जजों ने चुनाव आयोग के पोर्टल में गंभीर खामियां और कमियां बताई हैं. जजों का कहना है कि पोर्टल पर नोटिस भेजने, दस्तावेज अपलोड करने तक की सुविधा ठीक से काम नहीं कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बने ट्रिब्यूनल के जजों ने चुनाव आयोग के पोर्टल पर उठाए गंभीर सवाल. (पीटीआई)
एसआईआर को लेकर कोई न कोई बवाल सामने आ ही रहा है. अब पश्चिम बंगाल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बने ट्रिब्यूनलों के जजों ने चुनाव आयोग के डिजिटल पोर्टल को लेकर शिकायत की है. जजों ने पोर्टल में कई खामियां गिनाई हैं और पोर्टल पर मौजूद सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ये ट्रिब्यूनल SIR प्रक्रिया में डिलीट हुए करीब 27 लाख वोटरों की अपील सुनने के लिए बनाए गए थे. मामलों की सुनवाई के दौरान जजों को मिली शिकायतों और सामने आई कठिनाइयों के बाद उनका कहना है कि पोर्टल पर नोटिस भेजना, दस्तावेज अपलोड करना, वर्चुअल सुनवाई करना और डिलीट वोटर को बहाल करना संभव नहीं है. इससे अपीलों का निपटारा बहुत धीमा पड़ गया है.
11 अगस्त को 19 ट्रिब्यूनल जजों की बैठक के मिनट्स में ये शिकायतें दर्ज की गईं. जिन्हें चुनाव आयोग और कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भी भेजा गया. जजों ने लिखा कि कई बार याद दिलाने के बावजूद पोर्टल पर नोटिस भेजने की कोई व्यवस्था नहीं बनी. मई 2026 में कुछ जजों ने नोटिस का फॉर्मेट भी मंजूर किया था, लेकिन वह आज तक लागू ही नहीं हुआ है.
जजों ने बताया कि जब अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत पड़ती है तो उन्हें सुरक्षित रखने का कोई तरीका पोर्टल पर नहीं है. इसलिए वे ईमेल के जरिए डीएम और डीईओ को नोटिस भेज रहे हैं, लेकिन जवाब बहुत कम आ रहा है. वर्चुअल सुनवाई का भी कोई इंतजाम नहीं है. एक बार अपील निपट जाने के बाद अगर कोर्ट के आदेश से वोटर को बहाल करना हो तो पोर्टल पर वह संभव नहीं. अपीलकर्ता को ट्रिब्यूनल के आदेश की कॉपी भी डाउनलोड करने का कोई तरीका नहीं दिया गया है.
जजों ने कहा कि फिजिकली दाखिल अपीलों को डिजिटाइज करने की व्यवस्था भी ठीक नहीं है. जजों ने चेताया कि अगर ये अपील सही चैनल पर नहीं पहुंचीं तो नागरिकों के साथ अन्याय होगा. एक जज ने मई में ही हाईकोर्ट चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर नोटिस भेजने की व्यवस्था न होने की शिकायत की थी. उन्होंने कहा था कि इससे अपीलों का निपटारा धीमा हो रहा है और चुनाव आयोग गलत आंकड़े प्रेस को दे रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 10 को रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों के 19 ट्रिब्यूनल बनाने का आदेश दिया था. चुनाव आयोग ने मार्च 20 को इन्हें अधिसूचित किया. बाद में दो जजों ने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया, उनकी जगह नए जज बनाए गए. सितंबर 18 को सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने बताया कि कुल 38.31 लाख अपील दाखिल हुईं, जिनमें से 10 सितंबर तक सिर्फ 1.26 लाख का निपटारा हुआ. इनमें 22.21 लाख अपील डिलीट वोटरों की थीं.
अप्रैल के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा बहुमत मिला था. तृणमूल कांग्रेस ने वोटर डिलीशन को अपनी हार का एक कारण बताया था. 49 सीटों पर डिलीशन जीत के मार्जिन से ज्यादा थी. इनमें 26 सीटें भाजपा और 21 सीटें तृणमूल ने जीती थीं.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
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