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Sitamarhi Health News: सीतामढ़ी में नवजात शिशुओं की पीलिया जांच अब आसान हो गई है. 37 ‘ट्रांसक्यूटेनियस बिलीरुबीन मीटर’ मशीनों से बिना सुई चुभोए, सिर्फ 2 सेकंड में सटीक रिपोर्ट मिलेगी. इससे संक्रमण का खतरा नहीं होगा और समय पर इलाज से मस्तिष्क क्षति से बचा जा सकेगा.
सीतामढ़ी: जिले में नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य देखभाल को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक सराहनीय कदम उठाया है. अब जिले के 17 प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर 37 आधुनिक ‘ट्रांसक्यूटेनियस बिलीरुबीन मीटर’ मशीनें तैनात कर दी गई हैं. इस अत्याधुनिक तकनीक के आने से नवजात बच्चों में पीलिया (जॉन्डिस) की जांच के लिए अब दर्दनाक सुई चुभाने या ब्लड सैंपल लेने की पारंपरिक जरूरत पूरी तरह खत्म हो गई है.
बिना दर्द और इंफेक्शन के होगी जांच
अक्सर नवजात शिशुओं से खून निकालना न केवल उनके लिए अत्यंत कष्टदायक होता था, बल्कि इससे बाहरी इंफेक्शन का खतरा भी बना रहता था. अब इस नई गैर-आक्रामक मशीन के माध्यम से महज 1 से 2 सेकंड के भीतर बच्चे के माथे या छाती पर स्पर्श कराकर ही बिलीरुबिन के सटीक स्तर का पता लगा लिया जाता है.
1 घंटे का इंतजार खत्म, तुरंत मिलेगी रिपोर्ट
पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में जब नवजात बच्चे का ब्लड सैंपल लिया जाता था. तब रिपोर्ट आने में कम से कम 1 घंटे का समय लगता था. इसके विपरीत, नई बिलीरुबीन मीटर तकनीक से जांच की प्रक्रिया अत्यंत त्वरित और पारदर्शी हो गई है. सिविल सर्जन डॉ. आर.के. यादव ने डुमरा सीएचसी में एक नवजात शिशु पर इस मशीन का सफल परीक्षण कर इसकी कार्यप्रणाली का जायजा लिया. उन्होंने सभी चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात बच्चों की नियमित जांच करने का सख्त निर्देश दिया है.
बीएमएसआईसीएल से मिली डिवाइस
तकनीशियन सूरज कुमार ने बताया कि यह डिजिटल डिवाइस BMSICL की ओर से स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई गई है. यह तकनीक विशेष रूप से 0 से 30 दिन तक के (एक महीने के) नवजात शिशुओं में पीलिया का स्तर मापने के लिए डिजाइन की गई है.
देर होने पर मस्तिष्क पर पड़ सकता है बुरा असर
चिकित्सकों के अनुसार, नवजात शिशुओं में जन्म के शुरुआती दिनों में जॉन्डिस एक बेहद सामान्य लेकिन संवेदनशील समस्या है. यदि समय रहते बिलीरुबिन के स्तर का पता न चले, तो स्थिति बिगड़ने पर बच्चे के मस्तिष्क पर गंभीर और स्थायी असर पड़ सकता है. इस नई पोर्टेबल डिवाइस की मदद से डॉक्टर बिना समय गंवाए तुरंत उपचार की दिशा तय कर सकते हैं. सुई का प्रयोग न होने के कारण नवजात शिशुओं में किसी भी प्रकार के बाहरी संक्रमण का खतरा शून्य हो जाता है.
ग्रामीण इलाकों के अभिभावकों को बड़ी राहत
स्वास्थ्य विभाग, सीतामढ़ी ने सभी संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा पदाधिकारियों और तकनीशियनों को इस उपकरण के सुरक्षित संचालन एवं रख-रखाव के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. स्थानीय स्तर पर यह तकनीक उपलब्ध होने से दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले अभिभावकों को बहुत बड़ी राहत मिली है. अब माता-पिता को रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. मात्र 2 सेकंड में मिलने वाली सटीक रिपोर्ट से डॉक्टरों को भी सही समय पर सही इलाज शुरू करने में अभूतपूर्व मदद मिल रही है.
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